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रात का खाना कैसे, कब और क्या खाए?

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जैन धर्म में सूर्यास्त से पहले रात का भोजन कर लिया जाता है. रात के भोजन में ऐसा क्या खाएं, जिससे स्वास्थ्य के साथ-साथ पूरे दिन बेहतर महसूस करें, आइए जानते हैं.

सूरज के ढलते ही हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म हल्का हो जाता है और सूर्योदय के साथ तेज़ हो जाता है. समय की कमी के कारण हम या तो उल्टा-सीधा खाना खाते हैं या बहुत देर से खाते हैं और देर से खाना खाने के तुरंत बाद सो जाते हैं. इससे शरीर की पाचन-क्षमता कमजोर हो जाती है, खाया हुआ खाना ठीक से हजम नहीं होता हैं. इस वजह से गैस्ट्रिक और एसिडिटी जैसी अनेक परेशानियां शुरू हो जाती हैं.

इसलिए हमे रात का खाना सोने से 2 घंटे पहले खा लेना चाहिए. लेकिन ये जान ना ज़रूरी हैं की रात के भोजन में ऐसा क्या खाएं, जिससे स्वास्थ्य के साथ-साथ पूरे दिन बेहतर महसूस करे. रात का भोजन हमेशा हल्का और समय पर लेना चाहिए. रात के भोजन में नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए, रात को भोजन में नमक लेने से शरीर में वाटर रिटेंशन या एडिमा हो जाता है.

रात का भोजन ऐसा होना चाहिए की जिससे पेट भी भर जाए और पाचन तंत्र पर कोई बुरा प्रभाव भी न पड़े. एक दिन में कम-से-कम दो बार सलाद और एक बार फलों का सेवन जरूर करना चाहिए, जबकि भोजन दो बार करना चाहिए.

रात में हमेशा कम कैलोरी वाला भोजन करना स्वास्थय के लिए अच्छा रहता हैं. इसके लिए भोजन में कीवी, बड़ा सेब, नाशपाती, अनार, अनन्नास, नारियल गिरी, खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च, पनीर, मूंगफली आदि खाएं. इन सबसे हमें भरपूर मात्रा में वो सारे पोषक तत्व मिल जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए बेहद आवश्यक और लाभदायक हैं. रात को बहुत मसालेदार और ऑयली खाना खाने वालों को अक्सर गैस और कब्ज की समस्या हो जाती है.

रात में दही की जगह छाछ या मट्ठा पीना चाइये क्योंकि इससे आपके पेट में ठंडक पहुंचेगी.

रात में चावल खाना नुकसान देता हैं. इसकी जगह अगर रोटी खाई जाए तो हाजमा ज्यादा बेहतर रहता है.

रात को सोने से 30-45 मिनट पहले लो फैट दूध पी सकते हैं. रात को यदि ग्रीन टी पीकर सोया जाए तो शरीर का मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ जाता है जिससे शरीर की मरम्मत की क्षमता दोगुनी हो जाती है.

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