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मां महागौरी के पूजा से मिलता हैं ऐसा फल!

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आज चैत्र नवरात्रि के पूजा का आठवां दिन हैं और माता के पूजा का आठवां दिन माता गौड़ी का पूजा किया जाता हैं. माता दुर्गा के आठवें स्वरुप को गौड़ी या महागौड़ी भी कहा जाता हैं. माँ महागौड़ी भगवान शिव की पत्नी का नाम हैं. मां की आराधना व पूजा शिवा और शाम्भवी के नाम से भी की जाती है। मां का रूप गौर वर्ण का है। इनके सभी वस्त्र व आभूषण सफ़ेद रंग के होते हैं. माँ महागौड़ी को सफ़ेद रंग अतिप्रिय हैं. इसलिए माँ को पुष्प भी सफ़ेद रंग का चढ़ाया जाता हैं. 
 
माँ महागौड़ी ने भगवान शिव को तपस्या कर पति रूप में प्राप्त की हैं. इस कारण मां का शरीर काला पड़ जाता है। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव, उनके शरीर पर गंगाजल छिड़कते हैं, तब मां विद्युत के समान कांतिमान गौर वर्ण की हो जाती हैं। तभी मां का नाम गौरी पड़ा। माँ महागौड़ी का सवारी बैल और सिंह दोनों हैं. शास्त्रों के मुताबिक, अस्टमी पूजा के दिन माँ महागौड़ी को चुनरी भेंट करने से सुहाग सलामत रहता हैं. साथ ही पुरुष अपने अच्छे स्वास्थ्य का कामना करने के लिए माँ महागौड़ी की पूजा की जाती हैं. 

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