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वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट: भारत की ग्रोथ से भी तेज रहेगी नेपाल और बांग्लादेश की आर्थिक रफ्तार

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वर्ल्ड बैंक ने अभी हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में भारत की ग्रोथ रेट में कमी आने का अनुमान लगाया है साथ ही रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि 2019 में दक्षिण एशियाई देशों में नेपाल और बांग्लादेश की आर्थिक रफ्तार भारत से भी तेज रहेगी. वर्ल्ड बैंक ने इस रिपोर्ट में बताया है कि चालू​ वित्त वर्ष में पूरी दुनिया की तरह ही दक्षिण एशियाई देशों में भी अर्थिक सुस्ती रहेगी. पाकिस्तान को लेकर इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में मौद्रिक नीतियां कठोर रहने के कारण यहां की आर्थिक गति 2.4 प्रतिशत रहेगी. पाकिस्तान को लेकर यह भी कहा गया है कि राजकोषीय दबाव के कारण यहां घरेलू मांग में कमी जारी रहेगी.
 
दक्षिण एशिया की आर्थिक रफ्तार धीमी 

​वर्ल्ड बैंक ने अपनी इस रिपोर्ट में कहा है कि दक्षिण ​एशिया में ग्रोथ 5.9 प्रतिशत रहेगी जो अप्रैल 2019 की तुलना में 1.1 प्रतिशत कम है. हालांकि, इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि छोटी अवधि में हल्की तेजी नज़र आ सकती है. कहा जा रहा है कि हाल की मजबूत घरेलू मांग की वजह से ग्रोथ में तेजी रही थी. लेकिन अब मांग में कमी की वजह से यह धीमी हो गई है, जिसकी वजह से इस क्षेत्र में सुस्ती नज़र आ रही है.
 
सबसे अधिक प्रभावित देश पाकिस्तान और श्रीलंका 

दक्षिण एशिया में आयात पर भी प्रभाव पड़ा है. सबसे अधिक आयात का प्रभाव पाकिस्तान और श्रीलंका पर पड़ा है, जहां कुल आयात में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी आई है. भारत की चर्चा करें तो घरेलू मांग कम होने की वजह से पिछली तिमाही में निजी खपत 3.1 प्रतिशत रही है. पिछले साल इसी समय में यह 7.3 प्रतिशत रही थी. 2019 की दूसरी तिमाही में उत्पादन 1 प्रतिशत से भी कम हो गया है.
 
वर्ल्ड बैंक के दक्षिण एशियाई उपाध्यक्ष हार्टविग शैफर के अनुसार, 'औद्योगिक उत्पादन और आयात में कटौती और वित्तीय बाजार में टेंशन के कारण दक्षिण एशियाई बाजार में आर्थिक सुस्ती नज़र आ रही है.' उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अर्थव्यवस्था को लेकर वैश्विक और घरेलू अनिश्चित्तता को ध्यान में रखते हुए दक्षिण एशियाई देशों को निजी खपत के साथ-साथ निवेश बढ़ाने के लिए अपनी आर्थिक नीतियों में ढील देनी चाहिए.
 
दो वजहों से तेजी आने की उम्मीद 

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दक्षिण एशियाई देशों में आर्थिक सुस्ती साल 2008 और 2012 के दौर को दोहराते हुए नज़र आ रही है. हालांकि, इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि निवेश और निजी खपत में हल्की तेजी भी 2020 के दौरान दक्षिण ए​शियाई देशों के लिए आर्थिक तेजी को 6.3 प्रतिशत तक ले जा सकती है.
 
ट्रेड वॉर से बांग्लादेश को सबसे ज्यादा मुनाफा  

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चालू वित्त वर्ष के लिए ग्रोथ 6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. इसके बाद साल 2021 में यह 6.9 प्रतिशत और इसके अगले साल 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. वहीं, बांग्लादेश पर नज़र डालें तो 2019 में यहां की जीडीपी ग्रोथ 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है. 2018 में यह 7.9 प्रतिशत रहा था. वहीं, साल 2020 में इसके 7.2 प्रतिशत रहने और साल 2021 में 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण बांग्लादेश के गारमेंट इंडस्ट्री को जबरदस्त मुनाफा हुआ है.
 
वर्ल्ड बैंक के दक्षिण एशिया के चीफ इकोनॉमिस्ट हैंस टिमर ने बांग्लादेश के लिए कहा, 'हाई-फ्रिक्वेंसी डेटा देखने से पता चलता है कि भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका की तुलना में बांग्लादेश बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है. हमें यह औद्योगिक उत्पादन से लेकर निर्यात तक के डेटा में नज़र आ रहा है. इससे साफ पता चलता है कि बांग्लादेश की गारमेंट इंडस्ट्री बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है.'
 
दक्षिण एशियाई के अन्य देशों के क्या रहेंगे हालात 

 नेपाल की जीडीपी ग्रोथ चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. नेपाल में सर्विस और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों, बढ़ते टूरिज्म और पब्लिक खर्च बढ़ने के कारण यहीं के जीडीपी ग्रो​थ में यह तेजी नज़र आएगी.
 
अफगानिस्तान की चर्चा करें तो यहां चुनाव के बाद राजनीतिक स्थिरता और कृषि क्षेत्र के बेहतरीन प्रदर्शन से साल 2019 में जीडीपी ग्रोथ बढ़कर 3 प्रतिशत और साल 2021 में 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
 
मालदीव की जीडीपी ग्रोथ चालू वित्त वर्ष में 5.2  प्रतिशत रहने का अनुमान है. भूटान की में यह 7.4  प्रतिशत रहने का अनुमान है. 
 
श्रीलंका में चालू वित्त वर्ष के तहत 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है. हालांकि, निवेश और निर्यात में बढ़त होने की वजह से यह साल 2020 में 3.3 प्रतिशत और 2021 में 3.7 प्रतिशत रह सकती है.
 
पाकिस्तान के ​आर्थिक हालात को लेकर इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यहां एक और मैक्रोइकोनॉमिक संकट के कारण अर्थव्यव्स्था सुस्त हो रही. यहां राजकोषीय घाटे के साथ-साथ विदेशी रिजर्व पर भी दबाव बढ़ रहा है. IMF की सहायता के बाद भी पाकिस्तान में ग्रोथ नज़र नहीं आयेगी.

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