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#GudiPadwa: क्यों मनाया जाता है महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में गुड़ी पड़वा का पर्व

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चैत्र नवरात्रि के शुरू होते ही हिंदुओं का नव वर्ष भी शुरू हो जाता है। जिस दिन चैत्र नवरात्रि शुरू होता है उसदिन महाराष्ट्र और कोंकण में गुड़ी पड़वा नाम का पर्व मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा के दिन महाराष्ट्र और कोंकण में लोग अपने घर को फूलों से सजाते हैं और घर के आंगन में रंगोली बनाते हैं। वहीँ कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लोग इस पर्व को उगादि के नाम से मानते है। आज यानि 25 मार्च से चैत्र नवरात्रि के साथ हिंदू नव वर्ष भी शुरुआत हो गयी है।

चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपद को गुड़ी पड़वा या वर्ष प्रतिपदा या उगादि (युगादि) कहा जाता है। कहा यह भी जाता है कि इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसमें मुख्यतया ब्रह्माजी और उनके द्वारा निर्मित सृष्टि के प्रमुख देवी-देवताओं, यक्ष-राक्षस, गंधर्व, ऋषि-मुनियों, नदियों, पर्वतों, पशु-पक्षियों और कीट-पतंगों का ही नहीं, रोगों और उनके उपचारों तक का भी पूजन किया जाता है। इसी दिन से नया संवत्सर शुरू होता है।

कहा यह भी जाता है कि शालिवाहन नामक एक कुम्हार के लड़के ने मिट्टी के सैनिकों की सेना बनाई और उस पर पानी छिड़ककर उनमें प्राण फूँक दिए और इस सेना की मदद से शिक्तशाली शत्रुओं को उन्होंने पराजित कर दिया था। इसी विजय के प्रतीक के रूप में ही शालिवाहन शक का प्रारंभ हुआ। कई लोगों की मान्यता यह भी है कि इसी दिन भगवान श्री राम ने वानरराज बाली के अत्याचारों से दक्षिण की प्रजा को मुक्ति दिलाई थी। जब दक्षिण की प्रजा को बाली के त्रास से मुक्त मिली थी तब वहां के प्रजा ने अपने घर-घर में उत्सव मनाकर ध्वज (ग़ुड़ियां) फहराए था। वहीँ आज भी घर के आंगन में ग़ुड़ी खड़ी करने की प्रथा महाराष्ट्र में काफी प्रचलित है। इसीलिए इस दिन को गुड़ीपडवा का नाम भी नाम दिया गया हैं।

 

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