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आखिर क्या है ग्रीन पटाखे ?

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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दीपावली के मौके पर पटाखों की बिक्री से संबंधित एक फैसले के दौरान ग्रीन पटाखों का ज़िक्र किया था. कोर्ट ने मशविरा दिया था कि त्योहारों पर कम प्रदूषण करने वाले ग्रीन पटाखे ही बेचे और जलाए जाने चाहिए. आपको बता दें कि इन ग्रीन पटाखों की खोज भारतीय संस्था राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान ने की है. दुनियाभर में इन्हें प्रदूषण से निपटने के एक बेहतर तरीके की तरह देखा जा रहा है.

क्या हैं ग्रीन पटाखे: औद्योगिक अनुसंधान परिषद की संस्था नीरी ने ऐसे पटाखों की खोज की है जो पारंपरिक पटाखों जैसे ही होते हैं पर इनके जलने से कम प्रदूषण होता है. इससे आपकी दीवाली का मज़ा भी कम नहीं होता क्योंकि ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज़ में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं. हालांकि ये जलने पर 50फीसदी तक कम प्रदूषण करते हैं.

कितने तरह के होते हैं: नीरी के मुताबिक इस साल कई तरह के ग्रीन पटाखे बाजार में उपलब्ध होंगे. पिछले दिनों केंद्रीय विज्ञान मंत्री हर्षवर्धन ने सीएसआईआर-नीरी के वैज्ञानिकों के साथ ग्रीन पटाखों को एक प्रोग्राम में रिलीज भी किया. ग्रीन पटाखे मुख्य तौर पर तीन तरह के होते हैं. एक जलने के साथ पानी पैदा करते हैं जिससे सल्फ़र और नाइट्रोजन जैसी हानिकारक गैसें इन्हीं में घुल जाती हैं. इन्हें सेफ़ वाटर रिलीज़र भी कहा जाता है. दूसरी तरह के स्टार क्रैकर के नाम से जाने जाते हैं और ये सामान्य से कम सल्फ़र और नाइट्रोजन पैदा करते हैं. इनमें एल्युमिनियम का इस्तेमाल कम से कम किया जाता है. तीसरी तरह के अरोमा क्रैकर्स हैं जो कम प्रदूषण के साथ-साथ खुशबू भी पैदा करते हैं.

कहां मिलेंगे ग्रीन पटाखे: पिछले साल जब सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की सलाह दी थी. तब उन्हें बाजार में उपलब्ध कराने के लिए ज्यादा समय नहीं था लेकिन इस बार बाजार में ग्रीन पटाखे पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं. आप कहीं भी पटाखों की दुकानों से इन्हें खरीद सकते हैं. अलबत्ता एक बार दुकानदार से ये कन्फर्म जरूर कर लें कि ये ग्रीन पटाखे हैं या नहीं.

इस बार तैयार है शिवकाशीः इस बार बाजार में बिकने के लिए पटाखा और आतिशबाजी निर्माण के प्रमुख केंद्र शिवकाशी ने बड़े पैमाने पर ग्रीन पटाखे तैयार किये हैं, जो इको - फ्रेंडली होंगे. इनसे नुकसानदायक रासायनिक उत्सर्जन भी कम होगा और आवाज भी कम होगी. ये पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के तहत ही बनाए गए हैं. वर्ष 2018में दीवाली से ठीक पहले जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया तब उनके पास समय बहुत कम बचा था. लेकिन इस बार वहां की 1000मेनुफैक्चरिंग इकाइयों ने बड़े पैमाने पर ग्रीन पटाखों का निर्माण किया है. गौरतलब है कि शिवकाशी की आतिशबाजी इंडस्ट्री का हर साल का कारोबार करीब 6000करोड़ रुपए का होता है.

इस बार याद रखें कि दीवाली पर ग्रीन पटाखे और आतिशबाजी का ही इस्तेमाल करें. इस बार दशहरे में भी रावण दहन में ग्रीन पटाखों और आतिशबाजी का पहली बार बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ और प्रदूषण बहुत कम हुआ.

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