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#Pongal: क्या होता है पोंगल पर्व और कैसे मनाया जाता हैं?

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पोंगल दक्षिण भारत का और विशेष कर तमिलनाडु का पर्व है, जो मकर संक्रांति के मौके पर मनाया जाता है. यह पर्व तब मनाया जाता है, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं. इसलिए यह उत्तरायण पर्व भी कहलाता है. जहां उत्तर भारत में मकर सक्रांति का पर्व मनाया जाता हैं वही दक्षिण भारत में उसी तिथि पर पोंगल का पर्व मनाया जाता हैं. 
 
भारत के अधिकांश पर्व की तरह पोंगल भी एक कृषि से जुड़ा त्यौहार है. खेती और फसल से सीधा सम्बन्ध ऋतुओं से है और ऋतुओं का सीधा सम्बन्ध सूर्य से है. इसलिए इस दिन विधिवत सूर्य देव कि पूजा की जाती है. वास्तव में इस पर्व के अवसर पर किसान ईश्वर से प्रार्थना करते हैं और जीविकोपार्जन में उनकी सहायता करने लिए अपना आभार व्यक्त करते हैं.
 
इस त्यौहार को पोंगल इसलिए कहते हैं, क्योंकि इस दिन भगवान सूर्यदेव को जो प्रसाद अर्पित किया जाता है, तमिलनाडु में उसे पोंगल कहते हैं. तमिल भाषा में पोंगल का है: अच्छी तरह से उबालना और सूर्य देवता को भोग लगाना.
 
सदियों से चली आ रही परंपरा और रिवाजों के अनुसार इस दिन तमिलनाडु के लोग दूध से भरे एक बरतन को ईख, हल्दी और अदरक के पत्तों को धागे से सिलकर बांधते हैं और उसे प्रज्वलित अग्नि में गर्म करते हैं और उसमें चावल डालकर खीर बनाते हैं. फिर उसे सूर्यदेव को समर्पित किया जाता है. यह पर्व तमिल में लगातार चार दिनों तक मनाया जाता हैं. 

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