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आज है मां कुष्मांडा की पूजा का दिन, जानें माँ को खुश करने का तरीका!

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चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 25 मार्च को हो चूका हैं. और आज नवरात्रि का चौथा दिन हैं. नवरात्रि के इस चौथे दिन में माँ के चौथा स्वरुप का पूजा किया जाता हैं. माँ दुर्गा का चौथा स्वरुप कूष्मांडा के नाम से जाना जाता हैं. शास्त्रों में कहा गया हैं की जब सृष्टि नहीं थी और चारों तरफ सिर्फ अन्धकार ही अन्धकार था, तब मां दुर्गा के इसी स्वरुप ने हल्की सी मुस्कान बिखेर कर चारों तरफ प्रकाश ही प्रकाश उत्पन्न कर ब्रह्माण्ड की रचना की। यहीं वजह हैं की माता के चौथे स्वरुप  कूष्मांडा को आदिशक्ति कहा जाता हैं. 
 
वहीं माँ आदिशक्ति का आठ भुजा हैं. इसलिए इनको अष्टभुजा के भी नाम से जाना जाता हैं. माता के सात हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। और आठवें हाथ में सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। 
 
पूजा की विधि- 
नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा का पूजा-आराधना श्रद्धा पूर्वक किया जाता हैं. माँ के इस स्वरुप को हरा रंग बेहद प्रिय हैं. इसलिए इस दिन हरा रंग के आसान पर बैठकर पूजा करना बेहद शुभ मन जाता हैं. अगर कोई हमेशा बीमार रहता है तो उसे माँ कूष्मांडा का पूजा करना चाहिए। देवी को पूरे मन से फूल, धूप, गंध, भोग चढ़ाएं। पूजन के पश्चात् मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं। इसके बाद प्रसाद को किसी ब्राह्मण को दान करें। पूजा के बाद अपने से बड़ों को प्रणाम कर प्रसाद वितरित करें और खुद भी प्रसाद ग्रहण करें।

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