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cervical cancer: महिलाओं में बढ़ती जा रही है सर्वाइकल कैंसर की समस्या...भारत टॉप पर, जानें क्या है कारण, लक्षण और उपाय?

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नई दिल्ली: मानव अपने जीवन में अनेक बीमारियों से जूझता रहता है और कोई लिवर की समस्या से, कोई किडनी की समस्या से तो टी.वी. या दामा से। इन्हीं बीमारियों में एक ऐसी बीमारी भी है जिसका नाम सुनकर लोग स्तब्ध हो जाते हैं और उसका अभी तक कोई इलाज भी नहीं बना है और वो है कैंसर। कैंसर पीड़ित अपनी बीमारी के बारे में जानने के बाद से ही जिंदगी की उल्टी गिनती शुरु कर देते हैं। कैंसर की बात करें तो इनके भी अनेक प्रकार है उनमें से एक है सर्वाइकल कैंसर जो आजकल महिलाओं में ज्यादा देखने को मिल रहा है। महिलाओं में तो ये रोग ज्यादा देखने को मिल ही रहा है लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात है कि भारत इस मामले में टॉप पर है जहां महिलाओं की मौत सबसे ज्यादा हो रही है।
 
साल 2020 में 341,831 महिलाओं की हुई थी मौत
ग्लोबोकैन की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 में वैश्विक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर के 604,100 नए मामलों का पता चला जिसमें से 341,831 महिलाओं इस कैंसर के कारण अपनी जान गंवा दी थी। हाल ही में लैंसेट की एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि पूरी दुनिया में 40 प्रतिशत महिलाओं की मौत सर्वाइकल कैंसर की वजह से हुई है जबकि भारत में 23 प्रतिशत महिलाओं की मौत सर्वाइकल कैंसर के कारण होती है।
 
भारत में जल्द ही आएगा सर्वाइकल कैंसर का टीका
भारत में महिलाओं की हो रही कैंसर से भीषण मौत के आंकड़े को देखते हुए 'वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन' (WHO) ने बड़ा कदम उठाया है। WHO के मुताबिक भारत को सर्वाइकल कैंसर मुक्त कराने के लिए मानव पेपिलोमावायरस (एचपीवी) टीका बनाने वाला है। साथ ही ग्लोबल लेबल पर दुनिया भर में भेजे जाएंगे। जिसके तहत भूटान,मालदीव,म्यांमार,श्रीलंका और थाईलैंड ने सर्वाइकल कैंसर के इलाज के लिए राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण शुरू किया जाएगा।
 
महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर क्या होता है?
सर्वाइकल कैंसर से आपको रूबरू दें कि यह एक प्रकार का कैंसर है जो गर्भाशय के निचले सिरे से शुरू होता है जो ऊपरी योनि से संपर्क करता है जिसे गर्भाशय ग्रीवा कहा जाता है। मानव पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के खिलाफ स्क्रीनिंग और टीकों तक पहुंच की कमी के कारण अधिकांश विकासशील देशों में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर  मौत का एक आम कारण है।
 
सर्वाइकल कैंसर का क्या कारण है?
अधिकांश सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण के कारण होते हैं। एचपीवी वायरस का एक समूह है जो दुनिया भर में बेहद आम है। एचपीवी के 100 से अधिक प्रकार हैं, जिनमें से कम से कम 14 कैंसर पैदा करने वाले हैं यदि आप इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं का अधिक सेवन करती हैं, धूम्रपान करती हैं तो भी इसका जोखिम हो सकता है। एक अध्ययन से पता चलता है कि अधिकांश लोगों के जीवन में कभी न कभी एचपीवी का संक्रमण होता है पर उन्हें इसका एहसास नहीं होता क्योंकि उनका शरीर, संक्रमण से मुकाबला करके उसे खत्म कर देता है।
 
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण-
इसलिए नियमित तौर पर जांच कराते रहना चाहिए, जिससे शुरुआती स्टेज पर ही बीमारी की पहचान हो सके। मासिक स्राव में अनियमितता, माहवारी के अलावा भी रक्त स्राव होना, शारीरिक संबंध बनाने के बाद रक्त स्राव होना, मीनोपॉज के बाद रक्त स्राव होना, दुर्गंधयुक्त स्राव होना आदि सर्वाइकल कैंसर के लक्षण हैं।
इस कैंसर की 4 स्टेज होते हैं। अगर आखिरी स्टेज के लक्षण की बात करें तो गर्दन की गांठ, सीने में दर्द और पीठ में दर्द इस बीमारी के आखिरी लक्षण है।
 
स्टेज 0- सर्वाइकल कैंसर के पहले चरण में प्रीकैंसरस कोशिकाएं मौजूद होती हैं। 
 
स्टेज 1- कैंसर कोशिकाएं सतह से गर्भाशय ग्रीवा के गहरे ऊतकों में और संभवत गर्भाशय में और पास के लिम्फ नोड्स में विकसित हो जाती हैं।
 
स्टेज 2- इसमें कैंसर गर्भाशय ग्रीवा और गर्भाशय से आगे बढ़ जाता है, लेकिन श्रोणि की दीवारों या योनि के निचले हिस्से तक नहीं पहुंच पाता। यह पास के लिम्फ नोड्स को प्रभावित कर भी सकता है और नहीं भी।
 
स्टेज 3-  कैंसर कोशिकाएं योनि के निचले हिस्से या श्रोणि की दीवारों में मौजूद होती हैं, और यह मूत्रवाहिनी, मूत्राशय से मूत्र ले जाने वाली नलियों को अवरुद्ध कर सकती हैं। यह पास के लिम्फ नोड्स को प्रभावित कर भी सकता है और नहीं भी।
 
स्टेज 4- कैंसर मूत्राशय या मलाशय को प्रभावित करता है। यह लिम्फ नोड्स को प्रभावित कर भी सकता है और नहीं भी। बाद में चरण 4 में, यह लिवर, हड्डियों, फेफड़ों और लिम्फ नोड्स सहित दूर के अंगों में फैल जाएगा।
 
पहली स्टेज में किया जा सकता है इलाज
पहली स्टेज में आपरेशन या रेडियोथेरेपी द्वारा इसका इलाज किया जा सकता है। यदि कैंसर दूसरी स्टेज से ऊपर है तो रेडियोथेरेपी के साथ कीमोथेरेपी के प्रयोग से इस पर विजय पाई जा सकती है। एडवांस स्टेज में भी रोगी के लक्षणों को काबू किया जा सकता है और उम्र बढ़ा पाना संभव है।

कैंसर से बचने के लिए क्या खाना चाहिए?
इस बीमारी से बचने के लिए ऐसे फलों का सेवन करना चाहिए जो खाने में आसान, ताजा और उच्च पानी की मात्रा वाले होते हैं, जैसे जामुन, खरबूजा, केला, अनानास, नाशपाती आदि का सेवन कर सकते हैं। ब्लूबेरी में कई फाइटोकेमिकल्स और पोषक तत्व होते हैं, जो  कैंसर  विरोधी प्रभाव, एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि और डीएनए को नुकसान से बचाने की क्षमता दिखाते हैं।
 
रोकथाम को लेकर 1 सितंबर को पहली वैक्सीन लॉन्च की गई
सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम को लेकर गुरुवार 1 सितंबर को भारत में पहली स्वदेशी वैक्सीन लॉन्च की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैक्सीन के माध्मय से आने वाले वर्षों में कैंसर के इस गंभीर खतरे और मृत्युदर को काफी हद तक कम करने में सफलता मिल सकती है। सर्वाइकल कैंसर, मुख्यरूप से ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के विभिन्न वैरिएंट्स के कारण होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को इससे बचाव के उपाय करते रहने चाहिए।

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