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भगवान राम को क्यों कहते हैं कि मर्यादा पुरुषोत्‍तम, जानिए रामनवमी का महत्व

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चैत्र मास के शुक्ला पक्ष की नवमी तिथि को मर्यादापुरुषोत्त म भगवान राम के जन्मोत्सेव के रूप में मनाया जाता है। चैत्र नवरात्र के 9दिन देवी मां का व्रत रखा जाता है और आखिरी दिन को रामनवमी के रूप में देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है।

इस दिन देवी मां की विशिष्टक विधिविधान के साथ पूजा और हवन किया जाता है।

अयोध्याक में राजा दशरथ के घर महारानी कौशल्याथ की कोख से भगवान विष्णु् के सांतवें अवतार यानी भगवान राम ने जन्मी लिया और उस दिन तिथि चैत्र मास के शुक्लक पक्ष की नवमी थी। तभी से इस दिन को रामनवमी के रूप में मनाया जाने लगा।

पुराणों में बताया गया है कि प्रभु श्रीराम का जन्मा मध्यतकाल में हुआ था। यही कारण है कि नवरात्र का व्रत रखने वाले इस दिन भी तीसरे प्रहर तक व्रत करते हैं और फिर दोपहर में रामजन्मम उत्साव मनाया जाता है। ऐसी मान्याता हे कि इस व्रत के रखने से उपवासक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं ओर उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

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