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भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री, जिन्हें आज भी कंप्यूटर क्रांति के जनक के तौर पर किया जाता है याद

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पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी का जन्म 20अगस्त 1944को हुआ था। वह देश के सातवें और भारतीय इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री थे। वे राजनीति में नहीं आना चाहते थे, लेकिन हालात ऐसे बने कि वो राजनीति में आए और देश के सबसे युवा पीएम के रूप में उनका नाम दर्ज हो गया। राजीव गाँधी की राजनीती में आने की कोई रूचि नहीं थी, जिसके कारण वे पायलट की नौकरी कर रहे थे। लेकिन किसी ने ठीक ही कहा है कि, इंसान को जो नापसंद हो, वक्त उसे ही सामने लाकर खड़ा कर देता है। ठीक उसी तरह, 23जून 1980को राजीव गाँधी के छोटे भाई संजय गाँधी की एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो जाने के बाद, 1982में उसकी माँ इंदिरा गाँधी को सहयोग देने के लिए राजनीती में आना स्वीकार करना पड़ा। 1981में राजीव गांघी को भारतीय युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया।

वे अपने छोटे भाई संजय गाँधी की सीट अमेठी से लोकसभा का चुनाव जीत कर सांसद बने। 31अक्टूबर 1984को उसकी माँ प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या किए जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री बने और अगले आम चुनावों में 80%बहुमत यानि 400सीट पाकर भाड़ी सीटों से प्रधानमंत्री बने रहे।

राजीव गाँधी एक युवा प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने देश की प्रगति के लिए अमिट योगदान दी है। राजीव गांधी भारत में सूचना क्रांति के जनक माने जाते हैं। देश के कंप्यूटराइजेशन और टेलीकम्युनिकेशन क्रांति का श्रेय उन्हें जाता है। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में महिलाओं को 33%रिजर्वेशन दिलवाने का काम उन्होंने किया। साथी मतदाता की उम्र 21वर्ष से कम करके 18वर्ष तक के युवाओं को चुनाव में वोट देने का अधिकार राजीव गांधी ने दिलवाया। राजीव गाँधी देश के युवा वर्गों को काफी बढ़ावा देते थे। उनका मानना था कि, देश का विकाश युवाओं के द्वारा ही संभव है। इसके लिए उन्होंने जवाहर रोजगार योजना भी सुरु की थी।

राजीव गाँधी खुद भ्रष्टाचार विरोधी थे। विपक्ष द्वारा राजीव गांधी पर 64करोड़ रुपए का व फोर्स घोटाला करने का आरोप लगा और इन आरोपों के कारण अगले चुनाव में कांग्रेस पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया। भारतीय सेना द्वारा बोफ़ोर्स तोप की खरीदारी में लिए गये किकबैक (कमीशन - घूस) का मुद्दा उछला, जिसका मुख्य पात्र इटली का एक नागरिक ओटावियो क्वाटोराची था, जो कि सोनिया गांधी का मित्र था। अगले चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और सबसेे ज्यादा सीट जीतने के बाद भी राजीव गांधी ने सरकार नहीं बनाई और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

और कुछ दिनों के बाद चुनावों का प्रचार करते हुए 21 मई, 1991 को तमिलनाडु में तमिल आतंकवादियों ने राजीव की एक मानव बम विस्फ़ोट में हत्या करवा दी। राजीव गाँधी की अकारण हुई मृत्यु से जनता को गहरा आघात पहुंचा, जिसे आज भी याद करके लोगों को दिख होता है।

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