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नवमी पर कन्याओं को भोजन कराने का क्या है नियम, जानें कन्या पूजन की विधि

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नवरात्री की नवमी को कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा है. कुछ लोग अष्टमी की बजाय नवमी पर कन्या पूजन के बाद उन्हें भोजन कराते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि नवमी पर कन्याओं को भजन कराने का क्या महत्त्व है और नियम क्या है.

कन्या पूजन की विधि

- एक दिन पूर्व ही कन्‍याओं को उनके घर जाकर निमंत्रण दें.

- गृह प्रवेश पर कन्याओं का पूरे परिवार के साथ पुष्प वर्षा से स्वागत करें और नव दुर्गा के सभी नौ नामों के जयकारे लगाएं.

- अब इन कन्याओं को आरामदायक और स्वच्छ जगह बिठाएं.

- सभी के पैरों को दूध से भरे थाल या थाली में रखकर अपने हाथों से उनके पैर स्‍वच्‍छ पानी से धोएं.

- उसके बाद कन्‍याओं के माथे पर अक्षत, फूल या कुंकुम लगाएं.

- फिर मां भगवती का ध्यान करके इन देवी रूपी कन्याओं को इच्छा अनुसार भोजन कराएं.

- भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्‍य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पुनः पैर छूकर आशीष लें.

 

नवमी पर कन्याओं को भोजन कराने के नियम

- नवरात्रि केवल व्रत और उपवास का पर्व नहीं है

- यह नारी शक्ति के और कन्याओं के सम्मान का भी पर्व है

- इसलिए नवरात्रि में कुंवारी कन्याओं को पूजने और भोजन कराने की परंपरा भी है

- हालांकि नवरात्रि में हर दिन कन्याओं के पूजा की परंपरा है, लेकिन नवमी और नवमी को अवश्य ही पूजा की जाती है

- 2 वर्ष से लेकर 11 वर्ष तक की कन्या की पूजा का विधान किया गया है.

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