add image
add image

Judgementall Hai Kya Review: दिल जीत लेगा कंगना-राजकुमार का पागलपन अंदाज़

news-details

कंगना और विवाद का नाता एक साथ जुड़ा हुआ है और काफी विवादों के बाद आज फिल्म जजमेंटल है क्या रिलीज़ हो गयी. फिल्म के रिलीज़ होने से पहले फिल्म को लेकर कई सवाल उठ रहे थे कि आखिर फिल्म में ऐसा होगा जो लोग इसको देखने जायेंगे.

लेकिन जब हमें इसे देखने का मौका मिला तो पता चला कि ये एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों को बांधने में कामयाब हो सकती है. फिल्म देखने के बाद ये कहना जरूरी हो गया है कि यार इस फिल्म को जज मत करो क्योंकि आपको काफी मजा आने वाला है.

कहानी

ये एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है. फिल्म केशव और बॉबी के बारे में है को एक बार मिलते हैं और शुरू होता है मिस्ट्री गेम.केशव के घर में हुई है मौत और इस मौत का जिम्मेदार कौन है बचपन से ही दिमाग से हिली हुई बॉबी या फिर सीधा-सादा केशव? यही और बहुत कुछ आपको इस फिल्म में देखने को मिलेगा.

फिल्म काफी ट्विस्ट और टर्न से भरी हुई है.

बॉबी (कंगना रनौत) अपने बचपन के ट्रॉमा से गुजरने के बाद एक्यूट साइकोसिस नाम की दिमागी बीमारी से जूझ रही है. उसका बॉयफ्रेंड कम मैनेजर वरुण (हुसैन दलाल) उनके साथ है और कुछ ‘पाने’ के बजाए उसके साथ सब्जियां खरीदने में समय बिता रहा है.

बॉबी के घर आते हैं नए किराएदार केशव और रीमा, जिनकी जिंदगी बॉबी के लिए काफी अलग है. बॉबी, केशव और रीमा की इस अलग जिंदगी की ओर आकर्षित होती है लेकिन एक मर्डर के चलते उसका भ्रम टूटता है और वो केशव को शक की निगाह से देखने लगती है. अब बॉबी के दिमाग में जो चल रहा है वो सही है या नहीं? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

एक्टिंग

एक्टिंग की बाट करें तो कंगना और राजकुमार राव का इसमें कोई सानी नहीं है. दोनों ने फिल्म में कमाल कर दिखाया है. कंगना की परफॉर्मेंस बेमिसाल है और उनका किरदार आपको अपने से ऐसा जोड़ता है कि अंत तक नहीं छोड़ता. वहीँ राजकुमार राव की बाट करें तो इसमें दो राय नहीं है कि राजकुमार बॉलीवुड के टैलेंटेड एक्टर्स में से एक हैं और इस फिल्म में उन्होंने यह साबित भी किया है. राजकुमार अपने रोल में बखूबी फिट हुए हैं और उसके साथ पूरा-पूरा न्याय भी किया है.

सपोर्टिंग कास्ट में एक्टर हुसैन दलाल, सतीश कौशिक, अमायरा दस्तूर, अमृता पुरी और जिमी शेरगिल ने बढ़िया काम किया है. हुसैन दलाल के किरदार को देखकर आपका दिल पक्का खुश हो जाएगा, जो बहुत मजेदार है.

डायरेक्शन

फिल्म की कहानी के साथ डायरेक्टर प्रकाश कोवेलामुड़ी ने बहुत ही अच्छी कोशिश की है. पंचलाइन एकदम सही टाइमिंग के साथ हैं और फिल्म ने पूरा समय दर्शकों को साथ में जोड़े रखा. डायरेक्टर प्रकाश ने इस फिल्म को बहुत बढ़िया तरीके से बनाया है. फिल्म की सिनेमेटोग्राफी और एडिटिंग दोनों बढ़िया है. लाइट्स और म्यूजिक के साथ खेलकर जो डायरेक्टर प्रकाश ने कमाल किया है वो तारीफ के काबिल है. फिल्म के डायलॉग भी बहुत अच्छे हैं.

हालाँकि फ़िल्म में कमी यह कि सीन्स को बहुत खींचा गया. कुछ नहीं तो सेकंड हाफ में एक बार आपको जरूर लगेगा कि बहुत देर हो गई है और फिल्म का क्लाइमेक्स क्यों नहीं आ रहा है!

लेकिन ओवाराल बाट करें तो फिल्म बहुत अच्छी बनी है.एक डार्क फिल्म, जिसमें आप दिमागी रुप से परेशान इन्सान की नजरों से ये दुनिया देखेंगे, जो अपने अन्दर की शांति बाहर की दुनिया में ढूंढ रही है.

  • Tags
  • #

You can share this post!

Loading...