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आखिर क्या है ये ब्रेक्जिट?

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यूरोप बहुत से देशो का एक समहू है। इन में शामिल कुछ देशो के रिश्ते आपस में ठीक नहीं थे। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान युरोपियन देश आपस में झगड़ने लगे जिससे यूरोप बुरी तरह से प्रभावित हुआ। दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप के कुछ देशों को ये समझ आने लगा की इस तरह आपस में लड़कर कोई फयदा नहीं है। उसके बाद उन्हें ये मेहसूस हुआ की युरोपियन देशो को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए जिससे देशो की अर्थव्यवस्था में सुधार आ सके। कोयला और स्टील से इसकी शुरुआत करके इसे सीमा पार व्यापार तक बढ़ाया गया। उदहारण के तौर पर जैसे अगर आप एक कार बनाते है और ब्रिटेन में बेचते है तो आपको ब्रिटेन के नियम अनुसार सीमा शुल्क देना होगा या कोई  फ्रेंच ब्रिटेन में आकर रहना व काम करना चाहता है तो उसे एक लम्बे प्रवासन की प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता था।

यूरोप में ऐसे ही दर्ज़नो देश है जहाँ अपने अपने नियम और नीतियों को अपनाया जाता है। यूरोपियन संघ ने सबसे पहले यही विचार किया की क्यों ना सभी यूरोपियन देशो के एक जैसे ही नियम हो जिससे सीमा पार व्यापर और प्रवासन की प्रक्रिया में दिक्कत ना आए और संघ ने ऐसा ही किया। लगभग पश्चिम यूरोप के सभी देश 1993 में इस संघ में शामिल हो गए। इसके बाद से यूरोपियन संघ के सदस्यों देशों  के बीच आसानी से व्यापार , सेवाएं ,लोगो का दूसरे युरोपियन देशो में जाकर काम करना आसान हो गया जिससे युरोपियन देशो के बीच शान्ति का माहौल बना रहा। लेकिन ये युरोपियन संघ के लिए इतना आसान रहा नहीं, 2008 में आए वित्त संकट ने सभी यूरोपियन संघ के देशो को बड़ी बुरी तरह से प्रभावित किया। इसने संघ के अमीर  देशो पर भोझ डाल दिया जैसे ब्रिटैन मदद करे संघ के आर्थिक कमजोर देशो की। क्यूंकि यूरोपियन संघ के देशो के बीच नियम समान थे लोग आसानी से एक दूसरे देश जा सकते थे, तो आर्थिक रूप से कमजोर देशो के लोगों ने ब्रिटैन जैसे अमीर देश में काम करना शुरू कर दिया। उसके बाद से ब्रिटैन की विदेशी जनसँख्या तेज़ी से भड़ने लगी और वहाँ के लोगो ने धीरे धीरे इस बात पर आपत्ति जताना शुरू कर दिया और आगे चलकर ये ब्रिटैन का एक अहम मुद्दा बन गया।

एक सर्वे में हुए 45 प्रतिशत  ब्रिटैन के लोगो ने इसे ब्रिटैन के लिए बढ़ती समस्या का मुद्दा बतया था। 2016 में ब्रिटैन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने एक जनमत संग्रह करवाया जिसे नाम दिया  ब्रेक्सिट (ब्रिटैन + एग्जिट ) यह जनमत संग्रह यूरोपियन संघ को छोड़ने के लिए करवाया गया था जिसमे जनता ने लगभग बराबर वोट दिए। तबसे ब्रिटैन इस असमंजस में है की ब्रिटैन यूरोपियन संघ से एग्जिट ले या नहीं।

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