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हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का महत्व

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हिंदू धर्म जहां अलग-अलग समय पर अलग-अलग त्योहार मनाए जाते है। इस बार अक्टूबर के महीने को त्योहारों का महीना कह सकते है। 23 अक्टूबर यानि धनतेरस से ही दीपावली का त्योहार शुरू हो जाता है। लेकिन दीपावली के अगले ही दिन गोवर्धन की पूजा भी हिंदू धर्म में खूब प्रचलित है। जिसका हिंदू धर्म में एक अलग ही महत्व है। जिसके पीछे की कहानी भी अलग ही है, और लोग इसको पूरे रीत-रिवाज से मनाते है।
 
गोवर्धन को लेकर मान्यताएं
आइएं जानते है हिंदू धर्म में गोवर्धन को मनाने के पीछे की कथा के बारे में। पोराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण जी ने समस्त ब्रज वासियों को इंद्रदेव के भारी वर्षा के प्रकोप से बचाने के लिए लगातार सात दिन तक अपने हाथ की सबसे छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को संभाले रखा, और समस्त ब्रज वासियों को भारी वर्षा के प्रकोप से बचाया। जब इंद्रदेव को अभास हुआ की श्रीकृष्ण कोई साधारण पुरूष नहीं बल्कि स्वयं श्रीहरि है तो उन्होने भगवान श्रीकृष्ण जी से क्षमा मांगी, औऱ उनकी पूजा कर उनको भोग लगाया। बस तभी से हिंदू-धर्म में गोवर्धन पूजा को मनाने का विधान है।
 
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहर्त
वैसे तो गोवर्धन पूजा को दीपावली के एक दिन बाद मनाने का विधान  है। लेकिन इस वर्ष गोवर्धन पूजा को दीपावली के एक नहीं बल्कि दो दिन बाद मनाने का शुभ मुहर्त है। यह बदलाव सूर्य ग्रहण के कारण किया जा रहा है। 25 अक्टूबर को इस वर्ष सूर्या ग्रहण लगेगा, जिसके चलते गोवर्धन पूजा इस बार 25 की जगह 26 अक्टूबर को मनाई जाएगी। अगर गोवर्धन पूजा के शुभ मुहर्त की बात करें तो 26 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 29 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 43 मिनत तक है। वहीं पूजा अवधि 2 घंटे 14 मिनट तक की होगी।
 
जानिएं गोवर्धन पूजा की विधि
सबसे पहले पूजा के दिन गाय के गोबर से गोवर्धन देव की मूर्ति बनाई जाती है। मूर्ति बनाने के बाद पूजा स्थल पर एक चौकी रखकर इस पर गोवर्धन की मूर्ति स्थापित कर इन्हे पुष्पों से सजाएं। उसके बाद पूजा कर दीपक जलाएं, और भगवान को फूल, फल दीप आदि अर्पित करें। इसी के साथ पूजा के बाद सात बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय चारों और लोटे से जल गिराए और जौ बोते हुए परिक्रमा करें। (News By: Vanita)

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