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GST काउंसिल ने नहीं दी ऑटो सेक्टर को राहत, जाने कारण

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भारत की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ महीनों से चरमराई हुई है और इसका सबसे अधिक प्रभाव ऑटो इंडस्‍ट्री पर नज़र आ रहा है. ऑटो सेक्टर माँग और प्रोडक्‍शन लगातार कम हो रहा है. प्रोडक्‍शन कम होने के कारण ऑटो सेक्‍टर की बड़ी कंपनियां- अशोक लीलैंड, मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने कुछ समय के लिए प्‍लांट बंद तक कर दिए थे. इन हालातों में ऑटो सेक्टर को सरकार की ओर से बड़ा झटका मिला है.
 
कल यानी शुक्रवार को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में ऑटो सेक्टर की मांग को नजरअंदाज कर दिया गया. असल में, ऑटो इंडस्ट्री कारों पर लगने वाले 28 प्रतिशत जीएसटी में कटौती कर उसे 18 पर्तिशम करने की मांग कर रही थी. लेकिन काउंसिल की ओर से GST रेट में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है. ऑटो सेक्टर की मांग को ऐसे समय में खारिज किया गया है, जब पिछले लगभग एक साल से ऑटो कंपनियों की बिक्री और प्रोडक्‍शन में गिरावट दर्ज की जा रही है.
क्‍या है कारण 
काउंसिल के इस निर्णय को लेकर जीएसटी की फिटमेंट कमेटी ने पहले ही बताया था कि ऑटो इंडस्‍ट्री के लिए टैक्‍स स्‍लैब में कमी करने के फैसले का अधिकतर राज्‍य विरोध कर रहे हैं. टैक्‍स स्‍लैब में कटौती होने से राज्यों को राजस्व का भारी नुकसान होगा.
 
कमेटी के अनुसार, स्‍लैब में कटौती करने से टैक्‍स कलेक्‍शन में 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आएगी. अगस्त, 2019 में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 98,202 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी महीने में 93,960 करोड़ की तुलना में 4.51 प्रतिशत ज्यादा था. यह जीएसटी कलेक्शन स्तर हालांकि पिछले साल-दर-साल के आधार पर ज्यादा था लेकिन सरकार की उम्मीद के अनुसार एक लाख करोड़ रुपये से कम था.

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