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आर्थिक सुस्ती पर CEA सुब्रमण्यम की सलाह, अपने पैरों पर खड़ा हो प्राइवेट सेक्टर

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देश में आर्थिक सुस्‍ती का दौर चल रहा है. इस हाल में अलग-अलग प्राइवेट सेक्‍टर की कंपनियां सरकार से मदद मांग रही हैं. वहीं सरकार की ओर से इन सभी  कंपनियों को सलाह दी गयी है. मुख्य आर्थिक सलाहकार के. सुब्रमण्यम ने प्राइवेट सेक्‍टर की कंपनियों को अपनी सोच व कार्य प्रणाली में परिवर्तन करने को कहा है.
 
प्राइवेट सेक्‍टर की तुलना एक जवान हो चुके व्यक्ति से करते हुए सुब्रमण्यम ने कहा, ‘‘इस 30 साल के व्यक्ति को अब खुद अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए. यह बालिग व्यक्ति लगातार अपने पिता से सहायता की मांग  नहीं कर सकता. आपको अपनी इस सोच को बदलना होगा. आप इस प्रकार की सोच नहीं रख सकते कि फायदा तो खुद लूं और घाटा हो तो उसका बोझ सब पर डाल दूं.’’
 
साथ ही के सुब्रमण्यम ने प्राइवेट कंपनियों को मुश्किल के दौर में  सहायता या प्रोत्साहन पाने के अपने माइंडसेट को बदले. उन्होंने बताया कि उपभोग से नहीं बल्कि सिर्फ निवेश से अर्थव्यवस्था में तेज़ी आएगी और वो आगे बढ़ेगी. सुब्रमण्यम ने कहा कि खपत बढ़ने से 10,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय अथवा इससे अधिक आय वाली अर्थव्यवस्था को ही लाभ होगा. 
 
सरकार की तरफ से यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब ऑटो कंपनियों सहित और भी कई सेक्टर सरकार से सहायता मांग रहे हैं. कुछ दिन पहले ही ऑटो इंडस्‍ट्री के कई दिग्‍गजों ने वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण मीटिंग कर सरकार से वाहनों पर जीएसटी दर में कमी करने की मांग की थी. इसी प्रकार टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने अपने कारोबार की पस्त हालत पर लोगों और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए विज्ञापन निकाला है. अब रिटेल सेक्‍टर में बिस्‍किट निर्माता कंपनी Parle ने भी अग्रिम समय में 10 हजार लोगों को नौकरी से हाथ धोने का इशारा दिया हैं. साथ ही कंपनी ने बिस्‍किट पर जीएसटी दर में कमी  की भी मांग की है.

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