Surya Samachar
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मां ब्रह्मचारिणी की इस आरती से होता हैं सभी मनोकामना पूर्ण।

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26 मार्च बुधवार दिन यानी आज चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन हैं और दूसरा स्वरुप देवी ब्रह्मचारिणी का होता हैं. शास्त्रों के मुताबिक ब्रह्म शब्द का अर्थ तपस्या होता  हैं.  ब्रह्मचारिणी अर्थात तप की चारिणी-तप का आचरण करने वाली।  माँ ब्रह्मचारिणी तपस्या और आराधना की देवी मानी जाती हैं. माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरुप अत्यंत भव्य माना जाता हैं. माँ ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमंडल रहता हैं। माँ ब्रह्मचारिणी के पूजा में आरती का विशेष महत्व बताया जाता हैं कहा जाता हैं की माँ बरह्मचारिणी के पूजा में आरती सच्चे मन से करने पर सभी मनोकामना पूर्ण होता हैं. ब्रह्मचारिणी मां की यह आरती अत्यंत लाभदायक सिद्ध होती है।

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। 
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। 
ब्रह्मा जी के मन भाती हो। 
ज्ञान सभी को सिखलाती हो। 
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। 
जिसको जपे सकल संसारा। 
जय गायत्री वेद की माता। 
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। 
कमी कोई रहने न पाए। 
कोई भी दुख सहने न पाए। 
उसकी विरति रहे ठिकाने। 
जो तेरी महिमा को जाने। 
रुद्राक्ष की माला ले कर। 
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। 
आलस छोड़ करे गुणगाना। 
मां तुम उसको सुख पहुंचाना। 
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। 
पूर्ण करो सब मेरे काम। 
भक्त तेरे चरणों का पुजारी। 
रखना लाज मेरी महतारी। 

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