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इस्लामिक आतांकवाद का हथियार हैं - हिजाब, बुर्का

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शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा है कि देश में बुर्के पर बैन लगाया जाए. ध्यान देने की बात है कि शिवसेना भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी है. संपादकीय में लिखा है रावण की लंका में हुआ, राम की अयोध्या में बुर्के पर बैन कब लगेगा. 
 
हाल ही में कोलंबो में हुए बम विस्फोटों में 500 से अधिक लोगों की जान गई. सरकारों आंकड़े कुछ भी कहे पर वहां की तबाही के मंजर का अनुमान प्रकाशित फोटो के आधार पर आसानी से लगया जा सकता है. श्रीलंका में हुए ये विस्फोट इस्लामी आतंकवाद के आगाज व उसके अंजाम को दर्शाते है. विशव के कई देश आज इस्लामिक आतंकवाद से पीड़ित हैं. हर पीड़ित देश ने इस आतांकवाद से निपटने के लिए योजनाए बनाई है. पर इस्लामी आतंकवाद पर आज तक प्रभावी नियंत्रण नहीं पाया जा सका है. यही कारण है की इस्लामी आतंकवाद का कहर कभी महिलाओं, कभी बच्चों तो कभी निर्दोष नागरिक पर गाज बनकर गिरता रहता है और सैकड़ों लोग बेवजह अपनी जान गंवा देते है. 
 
नकाब, हिजाब, पर्दा, बुर्का, घूंघट, इसीलिए किया जाता है. कि कोई गैर मर्द किसी महिला को न देख सके. लज्जा महिलाओं का विशेष आभूषण माना जाता है. नारी सुलभ लज्जा ही, नारी को दूसरे लोगों से अलग करती है. उन्हें विशेष बनाती है. नकाब, बुर्का, घूंघट, हिजाब, उसी लज्जा का एक अंग है. पर आज हिजाब, बुर्का, आतंकवाद के लिए एक हथियार बन गया है. आतंकवादी इसकी आड़ में अपनी पहचान आसानी से छुपा लेते है. नकाब की आड़ लेकर किसी भी आतंवादी हमले को आसानी कर जाते है. 
 
फ्रांस, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों ने बुर्के व हिजाब पर बैन लगा रखा है. शिवसेना ने इन देशों का उदाहरण देते हुएकहा है कि देश में बुर्के पर प्रतिबंध कब से लगेगा ? नारी लज्जा की बात और है. पर इसकी आड़ में आतंकवादी गतिविधियों को छूट नहीं दी जा सकती. 
 
मनमोहन रामावत 
 
 
 

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