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रोहतांग सुरंग के जरिए चीन और पाकिस्तान की सीमा तक का सबसे आसान रास्ता

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सरकार ने रोहतांग सुरंग का निर्माण कराया है. इस सुरंग का कार्य अंतिम दौर में चल रहा है. चार करोड़ की लागत से बनी ये सुरंग दिसंबर में खुलने वाली है. रोहतांग सुरंग को इसलिए बनाया गया है. ताकि चीन और पाकिस्तान की सरहद पर तैनात सेना कर आसानी से रसद और हथियार पहुंचा पायें. इस सुरंग थ्री डी तकनीक से लैस किया जा रहा है. सुरंग से भीतर 8.9 किलोमीटर को तय करने के लिए महज 15 से 20 मिनट लगेंगे.

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने मनाली दौरे में बताया कि घूमने आने वाले देश-विदेश के सैलानियों को रोहतांग सुरंग का सफर याद भरा रहेगा.

सुरंग के भीतर थ्री डी का कार्य होने की वजह से, पर्यटक सुरंग के अंदर से स्क्रीनों से प्राकृतिक नजारों का लुत्फ़ उठा सकेंगे. इस सुरंग के बीच से गुजरने वाले लोगों को थ्रीडी के माध्यम से बर्फ के ग्लेशियरों के बीच से गुजरने का एहसास होगा. और ये भी महसूस होगा कि आप घने जंगलों से होकर गुजर रहे हैं.

पानी के रिसाव वाले स्थान पर कंक्रीट का पुल तैयार किया गया है और सैलानियों को सैर कराने के लिए साउथ पोर्टल पर विशेष बसें उपलब्ध करवाई जाएंगी.

बता दें कि भारतीय सेना के लिए चीन और पाकिस्तान की सीमा तक पहुंचने का सबसे आसान तरीका है. रोहतांग सुरंग को हिमालय के पीरपंजाल पहाड़ों में 8 किमी लंबी, जमीन से करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनने वाली, पहली सुरंग है. ये एशिया की सबसे बड़ी सुरंग होगी।

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