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जानें कब है अहोई अष्‍टमी और इस व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त

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अहोई अष्‍टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है. मान्‍यता के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से संतान फल की प्राप्‍ति होती है. कहा जाता है कि जो भी महिला पूरे मन से इस व्रत को रखती है उसके बच्‍चे दीर्घायु होते हैं. पौराणिक मान्‍यता है कि इस व्रत के प्रताप से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. अहोई अष्‍टमी के दिन माता पार्वती की पूजा का विधान है.

अहोई अष्‍टमी कब है?

अहोई अष्‍टमी का व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद और दीपावली  से आठ दिन पहले आता है. हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास की कृष्‍ण पक्ष अष्‍टमी को आता है. इस बार का अहोई अष्‍टमी 21अक्‍टूबर को है.

अहोई अष्टमी की तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

अहोई अष्‍टमी की तिथि: 21अक्‍टूबर 2019

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 21अक्‍टूबर 2019को सुबह 06बजकर 44मिनट से.

अष्टमी तिथि समाप्त: 22नवंबर 2019को सुबह 05बजकर 25मिनट तक.

पूजा का मुहूर्त

 21अक्‍टूबर 2019को शाम 05बजकर 42मिनट से शाम 06बजकर 59मिनट तक.

 तारों को देखने का समय: 21अक्‍टूबर 2019को शाम 06बजकर 10मिनट.

चंद्रोदय का समय: 21अक्‍टूबर 2019को रात 11बजकर 46मिनट तक.

अहोई अष्‍टमी का महत्‍व

यह अहोई अष्‍टमी के व्रत का विशेष महत्‍व है. इसे 'अहोई आठे' भी कहा जाता है क्‍योंकि यह व्रत अष्टमी के दिन पड़ता है. अहोई यानी के 'अनहोनी से बचाना'. किसी भी अमंगल या अनिष्‍ट से अपने बच्‍चों की रक्षा करने के लिए महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं. यही नहीं संतान की कामना के लिए भी यह व्रत रखा जाता है. इस दिन महिलाएं कठोर व्रत रखती हैं और पूरे दिन पानी की बूंद भी ग्रहण नहीं करती हैं. दिन भर के व्रत के बाद शाम को तारों को अर्घ्‍य दिया जाता है. हालांकि चंद्रमा के दर्शन करके भी यह व्रत पूरा किया जा सकता है, लेकिन इस दौरान चंद्रोदय काफी देर से होता है इसलिए तारों को ही अर्घ्‍य दे दिया जाता है. वैसे कई महिलाएं चंद्रोदय तक इंतजार करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर ही व्रत करती हैं. मान्‍यता है कि इस व्रत के पून्य प्रताप से बच्‍चों की रक्षा होती है. साथ ही इस व्रत को संतान प्राप्‍ति के लिए सर्वोत्‍तम माना गया है

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