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महिलाओं की मजबूत इच्छा शक्ति से गांव में लौटी खुशियां, 12 साल बाद फिर लहलहाई फसल

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बिहार: बिहार के दरभंगा में महिलाओं ने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। दरभंगा के बिरौल प्रखंड के लदहो गांव की रहने वाली 60 वर्षीय मंगला देवी 12 साल बाद गेहूं की लहलहाती हुई फसल में सोहनी कर रही हैं। जहां कहीं भी देंखें वहां दूर-दूर तक गेहूं और सरसों की फसलें लहलहाती हुई नजर आ रही हैं।

कभी नहीं होती थी खेती

आज बिरौल प्रखंड के लदहो गांव में गेंहू और सरसों की अच्छी फसल हो रही है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब यहां किसान खेती नहीं कर पाते थे। दरअसल एक साल पहले तक यहां की खेती वाली जमीन परसिर्फ पानी ही पानी भरा रहता था। यहां न तो धान बोएं जाते थे और न गेंहू और न हीं सरसों के बीज। जिसकी वजह से किसान बहुत परेशान और हताश हो चुके थें।

बांध टूटने से 12 सालों तक नहीं हुई फसल

लदहो गांव में करीब 12 सालों बाद खेती फिर से शुरू हुई है। क्योंकि इस गांव से गुजरने वाली जिवछ नदी का बांध टूटा हुआ था। जिसकी वजह से यहां हर साल बाढ़ का पानी 15 गांवों के 1500 एकड़ में खेत में भर जाता था। जिसके कारण यहां किसान खेत में कोई फसल नहीं लग पा रहे थे। गांव के लोग अपने मवेशियों के साथ दूसरी जगह शरण लेने को बाध्य थेँ। लेकिन अब यहां फिर से खेती होना मुमकिन हो सका है जिसकी वजह से इस गांव के निवासी काफी खुश नजर आ रहे हैं।

महिलाओं की इच्छाशक्ति से लौटी खुशियां

पिछले 12 सालों से लदहो गांव के लोग बाढ़ के पानी से काफी परेशान चल रहे थे। यहां के निवासियों ने कई बार बांध बनवाने की कोशिश की। लेकिन उनकी कोशिश हर बार नाकाम ही साबित हुई। जब पुरुषों से बात नहीं बनीं तो महिलाओं ने मोर्चा संभाला लिया। उन्होंने बाढ़ से भरने वाले पानी की समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने की ठानी। गांव की महिलाओं ने अपनी समस्या को सरकार तक पहुंचाने के लिए संगठन बनाया। हाइफर संस्था के सहयोग से इन महिलाओं ने मिलकर मानसी महिला संगठन बनाया। इन महिलाओं ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर आखिरकरा जिवछ नदी पर टूटे बांध को बनवा कर ही दम लिया। जिसकी वजह से अब गांव में फिर से खुशियां लौट चुकी हैं।

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