add image
add image

कम्प्यूटर भी करेगा इंसानी दिमाग के जैसा काम

news-details

आने वाले कुछ सालों में कंप्यूटर्स के काम करने का तरीका पूरी तरह से बदल सकता है। इस बदलाव की सबसे अहम बात यह होगी कि अब कंप्यूटर इंसानों के दिमाग की तरह काम करेंगे। ब्रिटेन की एक कंपनी ग्राफकोर के चीफ टेक्नॉलजी ऑफिसर साइमन नोवेल्स आने वाले दिनों में मशीन लर्निंग के बदल सकने वाले स्वरूप का खाका तैयार करने में जुटे हैं।

उनका फोकस मानव मस्तिष्क के उस हिस्से पर है जो गहराई से विश्लेषण कर सकता है। उनकी यह स्टार्टअप इंसान के दिमाग के न्यूरॉन्स की कार्यप्रणाली का अध्ययन कर रही है ताकि कंप्यूटर प्रोसेसर्स की अगली पीढ़ी में इसकी तर्ज पर इंतजाम किया जा सके। कंपनी का दांव इस बात पर है कि इससे कंप्यूटरों को आदमी की तरह सोचने लायक बनाया जा सकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्राय: ऐसा जटिल सॉफ्टवेयर समझा जाता है, जो विशाल डेटा का विश्लेषण कर सकता है, लेकिन नोवेल्स और उनकी ब्रिटिश स्टार्टअप के को-फाउंडर और सीईओ नाइजेल टून की दलील है कि सॉफ्टवेयर को चलाने वाले कंप्यूटरों में अब भी कई बड़ी बाधाएं मौजूद हैं। उनका कहना है कि समस्या चिप्स में है, जिन्हें उनकी कार्यप्रणाली के आधार पर सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट या ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट कहा जाता है। उनका कहना है कि ये चिप्स इस तरह डिजाइन नहीं की गई हैं कि वे आदमी के सोचने-समझने के किसी भी तरीके की तरह काम कर सकें।

कोई दोस्त सामने से आता दिखे तो उसे पहचानने जैसी क्रिया से मानव मस्तिष्क समस्याओं को सरल करने की दिशा में काम करता है, लेकिन कंप्यूटर हो सकता है कि उस व्यक्ति से हेलो कहने से पहले उसके चेहरे के हर पिक्सल का विश्लेषण करने लगे और अरबों तस्वीरों के डेटाबेस से उसकी तुलना करने लगे। इस तरह की गणना की तुक तब बनती थी, जब कंप्यूटर मुख्य रूप से कैलकुलेटर हुआ करते थे, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मामले में इस तरह की गणना बेमतलब है और संबंधित डेटा की प्रोसेसिंग में बहुत ऊर्जा की खपत हो जाती है।

नोवेल्स और उनसे ज्यादा कारोबारी रुझान वाले टून ने 2016में जब ग्राफकोर की स्थापना की थी, तो उन्होंने अपनी चिप्स में कंप्यूटिंग का इस तरह का जाल अपेक्षाकृत कम रखा था। इन्हें वे इंटेलिजेंस प्रोसेसिंग यूनिट यानी आईपीयू कहते हैं।

नोवेल्स ने कहा, 'दिमाग में कॉन्सेप्ट अस्पष्ट से होते हैं। बहुत सटीक डेटा पॉइंट्स को मिलाने से आप स्पष्ट रूप से कोई राय बना पाते हैं।' मानव मेधा के इस रूप के बारे में कई सिद्धांत हैं, लेकिन मशीन लर्निंग सिस्टम्स को बहुत ज्यादा सूचनाओं की प्रोसेसिंग करनी होती है, लिहाजा नोड की तरह के डेटा प्वाइंट्स को कनेक्ट करने की विशेषज्ञता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास में अहम हो सकती है। ग्राफकोर दरअसल कंप्यूटरों के लिए दिमाग डिवेलप कर रही है। इसके को-फाउंडर्स का कहना है कि यह दिमाग सूचनाओं की प्रोसेसिंग काफी हद तक आदमी की तरह कर सकेगा।

टून ने कहा, 'दशकों से हम मशीनों को बता रहे हैं कि उन्हें कदम दर कदम क्या करना है, लेकिन अब हम ऐसा नहीं कर रहे हैं। यह 1970के दशक में वापस जाने जैसी बात है। हम इंटेल को रीइनवेंट कर रहे हैं।'

बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले अधिकतर चिप डिजाइंस पर कंट्रोल रखने वाली आर्म होल्डिंग्स के को-फाउंडर और इनवेस्टर हर्मैन हॉजर ने कहा, 'ऐसा कंप्यूटरों के इतिहास में केवल तीन बार हुआ है। 1970 में सीपीयू, 1990 में जीपीयू और अब ग्राफकोर का कदम तीसरा है।'

  • Tags
  • #

You can share this post!

Loading...