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जानिए रंगदारी एकादशी होली की मान्यता और पूजा विधि

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रंगभरी एकादशी होली से 5 दिन पहले आती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी जिसे आमलकी एकादशी भी कहते है। मान्यता के अनुसार रंगभरी एकादशी का व्रत रखने से सभी तरह के पापों का नाश होता है और पुण्य फल मिलता है। हिंदू शास्त्रों में रंगभरी एकादशी के दिन पर स्नान, दान और व्रत करने से हजारों गोदान के बराबर फल की प्राप्ति बताई गई है। रंगभरी एकादशी भगवान श्रीहरि यानी विष्णु जी की पूजा-अर्चना से संबंधित व्रत है।

- इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु आंवले के पेड़ में निवास करते हैं। इस बार रंगभरी एकादशी रविवार के दिन पड़ रही है जिससे इसका महत्व काफी बढ़ गया है।

- रंगभरी एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह उठ कर स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु का  ध्यान कर के रंगभरी एकादशी के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके साथ ही व्रत के सभी नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है।

- रंगभरी एकादशी का महत्व काशी में विशेष महत्व रखता है ऐसी मान्यता है भोलेनाथ स्वयं होली खेलने के लिए भक्तों के बीच आते हैं। इस दिन बाबा विश्वनाथ का संग होली खेली जाती है और शोभायात्रा निकाली जाती है।

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