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मकर सक्रांति में तिल गुड़ खाना क्यों माना जाता है शुभ...

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15 जनवरी यानी बुधवार को पुरे उत्तर भारत में मकर सक्रांति का त्योहार मनाया जाने वाला हैं. मकर राशि में सूर्य की संक्रान्ति यानी प्रवेश को ही मकर संक्रांति कहते हैं। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास या यू कह ले मलमास समाप्त हो जाता है और नए साल पर अच्छे दिनों यानी शुभ दिनों की शुरुआत हो जाती है। मकर संक्रांति की सुबह सूर्य की उपासना/पूजा की जाती है। इस त्योहार में सूर्य देव का खास तौर पर पूजा किया जाता हैं.
 
इस साल सूर्य देव बुधवार को मकर राशि में आ रहे हैं. इसलिए यह त्योहार 14 यानी मंगलवार के जगह बुधवार को मनाया जा रहा हैं. इस दिन कई चीजों की खाने की खास मान्यता हैं. तो जैसे इस दिन मूंगफली, दही चुड़ा, गुड़, तिल के लड्डू और खिचड़ी। लेकिन तिल और गुड़ का खास महत्व होता है। आइए हम आपको आज इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी के सेवन के महत्व के बारे में बताते हैं। और जानते हैं क्यों इन दिनों इस चीज को खाना शुभ माना जाता हैं. 
 
मकर संक्रांति पर लोग तिल और गुड़ से बनी चीजों का दान करते हैं और इससे बनी चीजें जरूर खाते हैं। नए चावल से बनी खिचड़ी खाना बहुत ही शुभ माना जाता है। दरअसल, बता दे कि इसके पीछे एक धार्मिक और एक वैज्ञानिक कारण है। 
 
इस त्योहार पर घर में गुड़ के लड्डू बनाए जाने की परंपरा है। इसके अलावा भी सफेद और काली तिल के भी लड्डू बनाए जाते हैं। दरअसल, मान्यताओं के अनुसार इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत होती है, तो कड़वी बातों को भुलाकर साल कि नई मिठास से शुरुआत कि जाती हैं. 
 
वैज्ञानिक कारण यह है कि, सर्दियों में शरीर का तापमान गिर जाता है। ऐसे में हमें बाहरी तापमान से अंदरुनी तापमान को गर्म रखना पड़ता हैं और तिल और गुड़ गर्म होते हैं, यह खाने से शरीर गर्म रहता है। इसलिए इस त्योहार में ये चीजें खाई और बनाई जाती हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक तिल खाने से शरीर गर्म रहता है और इसके तेल से शरीर को भरपूर नमी मिलती है।

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